आइए जानते है दोस्तो गीता के श्लोक गीता के कुल 700 श्लोकों में से केवल ये 9 श्लोक बदल सकते हैं हर किसी का भाग्य श्लोक- 1 योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय। सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।। अर्थात- हे धनंजय (अर्जुन)। कर्म न करने का आग्रह त्यागकर, यश-अपयश के विषय में समबुद्धि होकर योगयुक्त होकर, कर्म कर, (क्योंकि) समत्व को ही योग कहते हैं। गीता के कुल 700 श्लोकों में से केवल ये 9 श्लोक बदल सकते हैं हर किसी का भाग्य श्लोक- 2 नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना। न चाभावयत: शांतिरशांतस्य कुत: सुखम्।। अर्थात- योगरहित पुरुष में निश्चय करने की बुद्धि नहीं होती और उसके मन में भावना भी नहीं होती। ऐसे भावनारहित पुरुष को शांति नहीं मिलती और जिसे शांति नहीं, उसे सुख कहां से मिलेगा। गीता के कुल 700 श्लोकों में से केवल ये 9 श्लोक बदल सकते हैं हर किसी का भाग्य श्लोक- 3 विहाय कामान् य: कर्वान्पुमांश्चरति निस्पृह:। निर्ममो निरहंकार स शांतिमधिगच्छति।। अर्थात- जो मनुष्य सभी इच्छाओं व कामनाओं को त्याग कर ममता रहित और अहंकार रहित होकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे ही शांति प्र...