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Showing posts from November, 2021

महाभारत के परमुंक भाग MAHABHARAT KE PARMUKH BHAG

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MAHABHARAT KE PARMUKH BHAG महाभारत के परमुख भाग महाभारत महाभारत में यूं तो हजारों किरदार हैं, लेकिन यहां प्रस्तुत है उन लोगों के बारे में संक्षिप्त परिचय जिनका महाभारत के युद्ध से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संबंध रहा है। वह भी जिनकी महाभारत में ज्यादा चर्चा होती है।   कृष्ण-  वसुदेव और देवकी की 8वीं संतान और भगवान विष्णु के 8वें अवतार जिन्होंने अपने दुष्ट मामा कंस का वध किया था। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र युद्ध के प्रारंभ में गीता उपदेश दिया था। कृष्ण की 8 पत्नियां थीं, यथा रुक्मणि, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। श्रीकृष्ण के लगभग 80 पुत्र थे। उनमें से खास के नाम हैं- प्रद्युम्न, साम्ब, भानु, सुबाहू आदि। साम्ब के कारण ही कृष्ण कुल का नाश हो गया था। साम्ब ने दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से विवाह किया था।   भीष्म-  8 वसुओं में से एक और शांतनु एवं गंगा के पुत्र भीष्म का नाम देवव्रत था। जब देवव्रत ने अपने पिता की प्रसन्नता के लिए आजीवन ब्रह्मचारी रहने का प्रण लिया, तब से उनका नाम भीष्म हो गया। उनके पिता की दूसरी पत्नी का ...

हनुमान चालीसा पाठ हिन्दी Hanuman chalisa path

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Ram Chandra हनुमान चालीसा क्या है  हनुमान चालीसा एक भक्ति भजन (स्तोत्र) है जो हनुमान जी को संबोधित है। हनुमान चालीसा महान संत तुलसीदास ने 16 वीं शताब्दी में अवधी भाषा में लिखा है। माना जाता है कि संत तुलसीदास ने हनुमान चालीसा की रचना हरिद्वार में कुंभ मेले में समाधि की स्थिति में की थी। इस रचना में भगवान हनुमान की प्रशंसा में 40 छंद हैं। हनुमान चालीसा हनुमान की प्रशंसा में सबसे लोकप्रिय भजन हैऔर हर दिन लाखों हिंदुओं द्वारा सुनाया जाता है। हनुमान चालीसा  में भगवान राम के गुणों का भी सुश्राव्य वर्णन है। हनुमान चालीसा के लाभ  हनुमान चालीसा की एक एक चौपाई मन्त्र रूप है जो विभिन्न स्थितिओं में हमें लाभ पहुँचाती है। हनुमान जी प्राण के देव माने जाते हैं जिनकी उपासना से प्राणशक्ति बढ़ती है। बढ़ी हुई प्राणशक्ति हमारे भीतर से भय, अविश्वास, संदेह दूर कर कुछ भी कर सकने का आत्मबल देती है। इसलिए सभी को हनुमान चालीसा का गान करना चाहिए। हनुमान चालीसा  श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।। गुरुदेव...